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मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती

मेरे देश की धरती सोना उगले , उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती   जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अँगड़ाइयाँ लेती है क्यों ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जन्म लिया उसने ही पाया प्यार तेरा यहाँ अपना पराया कोई नही हैं सब पे है माँ उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती   ये बाग़ हैं गौतम नानक का खिलते हैं अमन के फूल यहाँ गांधी , सुभाष , टैगोर , तिलक ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ रंग हरा हरिसिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगतसिंह से रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती  

मेरा रंग दे बसंती चोला मेरा रंग दे

मेरा रंग दे बसंती चोला , मेरा रंग दे मेरा रंग दे बसंती चोला ओये रंग दे बसंती चोला माये रंग दे बसंती चोला मेरा रंग दे बसंती चोला , मेरा रंग दे मेरा रंग दे बसंती चोला ओये रंग दे बसंती चोला माये रंग दे बसंती चोला दम निकले इस देश की खातिर , बस इतना अरमान है दम निकले इस देश की खातिर , बस इतना अरमान है एक बार इस राह में मरना , सौ जन्मों के समान है देख के वीरों की क़ुरबानी देख के वीरों की क़ुरबानी , अपना दिल भी बोला मेरा रंग दे बसंती चोला मेरा रंग दे बसंती चोला , मेरा रंग दे मेरा रंग दे बसंती चोला ओये रंग दे बसंती चोला माये रंग दे बसंती चोला जिस चोले को पहन शिवाजी , खेले अपनी जान पे जिस चोले को पहन शिवाजी , खेले अपनी जान पे जिसे पहन झाँसी की रानी , मिट गई अपनी आन पे आज उसी को पहन के निकला , पहन के निकला आज उसी को पहन के निकला , हम मस्तों का टोला मेरा रंग दे बसंती चोला मेरा रंग दे बसंती चोला , मेरा रंग दे मेरा रंग दे बसंती चोला ओये रंग दे बसंती चोला माये रंग दे बसंती चोला  

संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं

हो हो हो.. संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं तो चिट्ठी आती है वो पूछे जाती है के घर कब आओगे के घर कब आओगे लिखो कब आओगे के तुम बिन ये घर सूना सूना है संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं तो चिट्ठी आती है वो पूछे जाती है के घर कब आओगे के घर कब आओगे लिखो कब आओगे के तुम बिन ये घर सूना सूना है किसी दिलवाली ने किसी मतवाली ने हमें खत लिखा है ये हमसे पूछा है किसी की साँसों ने किसी की धड़कन ने किसी की चूड़ी ने किसी के कंगन ने किसी के कजरे ने किसी के गजरे ने महकती सुबहों ने मचलती शामों ने अकेली रातों ने अधूरी बातों ने तरसती बाहों ने और पूछा है तरसी निगाहों ने के घर कब आओगे , के घर कब आओगे लिखो कब आओगे के तुम बिन ये दिल सूना सूना है संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं तो चिट्ठी आती है वो पूछे जाती है के घर कब आओगे के घर कब आओगे लिखो कब आओगे के तुम बिन ये घर सूना सूना है   मोहब्बत वालों ने , हमारे यारों ने हमें ये लिखा है , कि हमसे पूछा है हमारे गाँवों ने , आम की छांवों ने पुराने पीपल ने , बरसते बादल ने खेत खलियानों ने , हरे मैदानों ने बसंती बेलों ने , झूमती बेलों...

ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन

ऐ मेरे प्यारे वतन , ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल क़ुरबान तू ही मेरी आरज़ू , तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान ऐ मेरे प्यारे वतन , ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल क़ुरबान   तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम चूम लूँ मैं उस ज़ुबाँ को जिसपे आए तेरा नाम सबसे प्यारी सुबह तेरी , सबसे रंगीं तेरी शाम तुझपे दिल क़ुरबान तू ही मेरी आरज़ू , तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान   माँ का दिल बन के कभी सीने से लग जाता है तू माँ का दिल बन के कभी सीने से लग जाता है तू और कभी नन्हीं सी बेटी बन के याद आता है तू जितना याद आता है मुझको उतना तड़पाता है तू तुझपे दिल क़ुरबान तू ही मेरी आरज़ू , तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान   छोड़ कर तेरी ज़मीं को दूर आ पहुंचे हैं हम छोड़ कर तेरी ज़मीं को दूर आ पहुंचे हैं हम फिर भी है ये ही तमन्ना तेरे ज़र्रों की क़सम हम जहाँ पैदा हुए उस जगह ही निकले दम तुझपे दिल क़ुरबान तू ही मेरी आरज़ू , तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान ऐ मेरे प्यारे वतन , ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल क़ुरबान  

है प्रीत जहाँ कि रीत सदा

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने, भारत ने, मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आयी, तारों की भाषा भारत ने दुनिया को पहले सिखलायी, देता ना दशमलव भारत तो, यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था धरती और चाँद की दूरी का, अंदाज़ा लगाना मुश्किल था सभ्यता जहाँ पहले आयी, सभ्यता जहाँ पहले आयी पहले जनमी है जहाँ पे कला, अपना भारत वो भारत है जिसके पीछे संसार चला, संसार चला और आगे बढ़ा यूँ आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया भगवान करे ये और बढ़े, बढ़ता ही रहे और फूले-फले बढ़ता ही रहे और फूले-फले   है प्रीत जहाँ की रीत सदा, है प्रीत जहाँ की रीत सदा है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ है प्रीत जहाँ की रीत सदा   काले   गोरे का भेद नहीं, हर दिल से हमारा नाता है कुछ और न आता हो हमको, हमें प्यार निभाना आता है जिसे मान चुकी सारी दुनिया, ओ जिसे मान चुकी सारी दुनिया, मैं बात मैं बात वो ही दोहराता हूँ भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ है प्रीत जहाँ की रीत सदा,   जीते हो किसी ने देश तो क्या, हमने तो दिलों को जीता है...

ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा

  ऐ मेरे वतन के लोगों , तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सबका , लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर , वीरों ने है प्राण गंवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो , कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये , जो लौट के घर न आये ऐ मेरे वतन के लोगों , ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी , ज़रा याद करो कुर्बानी ऐ मेरे वतन के लोगों , ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी , ज़रा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय , ख़तरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लडे वो जब तक थी साँस लडे वो , फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा , सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुए हैं उनकी , ज़रा याद करो कुर्बानी जब देश में थी दीवाली , वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में , वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने , थी धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुए हैं उनकी , ज़रा याद करो कुर्बानी कोई सिख कोई जाट मराठा , कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मद्रासी , कोई गुरखा कोई मद्रासी सरहद पर मरने वाला , सरहद पर मरने वाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर , वो खून था हिन्दुस्तान...

कर चले हम फ़िदा जनों तन साथियों

  कर चले हम फ़िदा , जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों कर चले हम फ़िदा , जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों कर चले हम फ़िदा , जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों साँस थमती गई , नब्ज़ जमती गई फिर भी बढ़ते कदम को ना रुकने दिया कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं सर हिमालय का हमने न झुकने दिया मरते-मरते रहा बाँकपन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों कर चले हम फ़िदा , जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों ज़िन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की रुत रोज़ आती नहीं हुस्न और इश्क दोनों को रुसवा करे वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं आज धरती बनी है दुल्हन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों कर चले हम फ़िदा , जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों राह कुर्बानियों की ना वीरान हो तुम सजाते ही रहना नये काफ़िले फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है ज़िन्दगी मौत से मिल रही है गले बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों कर चले हम फ़िदा , जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों खेंच दो अपने ...